बड़ी खबर! तृतीय श्रेणी शिक्षकों को मिलेगी पदोन्नति, भजन लाल सरकार में पूरी होगी आस, जानिए पूरी खबर

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तृतीय शिक्षकों को नई सरकार से अब पदोन्नति मिलने की उम्मीद है। राजस्थान में पिछले समय गहलोत सरकार थी लेकिन गहलोत सरकार से इन तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने अपनी नाराजगी जताई है। अब इन्हे उम्मीद है की इस बार सत्ता में भजन लाल सरकार होने से तबादले हो सकते है।

सत्ता में नई सरकार से ये टीचर अपनी पूरी आस जमाए बैठे है। ऐसा माना जा रहा है की भजन लाल सरकार बीच का रास्ता निकालकर समस्याओ का समाधान करेगी। शिक्षकों ने बताया की तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के तबादले नहीं होने से कई विद्यालयों में पद खाली पड़े है।

इसके साथ ही कई शिक्षक दूसरे जिलों में अपनी नौकरी कर रहे है वे भी अपने जिले में तबादले का इंतजार कर रहे है। पिछले कुछ सालो से इन शिक्षकों की मांग चल रही है।

प्रदेश की पूर्व कांग्रेस सरकार ने तृतीय शिक्षकों की मांग पर 18 अगस्त 2021 से शाला दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। जिसमे प्रदेश के 33 जिलों से 80 हजार 781 शिक्षकों ने अपने तबादले के लिए आवेदन किए थे।

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लेकिन गहलोत सरकार ने आवेदन लेने के बाद भी दो साल तक सत्ता में रहने के बाद भी तबादले नहीं करवाए। इसीलिए अब शिक्षकों को भजन लाल सरकार से तबादले की उम्मीद है।

30 हजार शिक्षक कर रहे है पदोन्नति का इन्तजार

शिक्षको को पदोन्नति का लंबे समय से इंतजार है। तृतीय श्रेणी के शिक्षक करीब 4 साल से अपनी पदोन्नति का इन्तजार कर रहे है। तृतीय श्रेणी के शिक्षक विभागीय पदोन्नति का इन्तजार कर रहे है।

अतिरिक्त विषय में स्नातक डिग्रीधारियों की डीपीसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है इस मामले के कारण 30 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति रुकी हुई है। तृतीय श्रेणी शिक्षक पदोन्नति नहीं होने से वरिष्ठ अध्यापक पद पर पदोन्नत नहीं हो पा रहे है। सरकार भी इस मसले का हल नहीं निकाल पा रही है।

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जानिए पूरा मामला

शिक्षा विभाग में पहले डीपीसी में अतिरिक्त विषय में ग्रेजुएट पास को पदोन्नति के लिए पात्र माना जाता था लेकिन पिछली बार की कांग्रेस सरकार ने बिना शिक्षा सेवाओं में संसोधन किए एक कमेटी के फैसले का हवाला देते हुए डीपीसी में अतिरिक्त विषय में ग्रेजुएट पास को पदोन्नत के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया।

इस कारण से करिब 700 शिक्षक वंचित हुए जिसके कारण वे हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने डीपीसी पर स्टे दे दिया। इसके बाद सरकार खंडपीठ में गई। खंडपीठ में भी अतिरिक्त विषय में स्नातक शिक्षकों की पदोन्नति कर बंद लिफ़ाफ़े में डीपीसी करने पर हा कर दी थी। इस वजह से शिक्षक सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। बंद लिफाफे में डीपीसी में स्थगन ले आए।

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